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ऑटो एम्बूलेंस योजना में सहभागी बना आरडीपीएस स्कूल
वार्षिक सहयोग के लिए आगे आए समाजसेवी
बैतूल। बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा समिति संरक्षक डॉ अरुण सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में संचालित ऑटो एम्बूलेंस योजना के सफलतम छह महीने पूरे हो चुके है। अब तक योजना के तहत 50 से अधिक घायलों ऑटो चालकों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया जा चुका है। समिति के इस प्रयास की सराहना करते हुए अब बैतूल जिले के समाजसेवी भी इस योजना से जुडऩे लगे है। जिला मुख्यालय पर संचालित अग्रणी निजी स्कूल आर डी पब्लिक स्कूल भी घायलों को त्वरित उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने प्रारंभ की गई इस योजना में सहभागी बन गया है। स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती रितु खण्डेलवाल ने शनिवार को योजना के क्रियान्वयन में 5 हजार रुपए वार्षिक वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। संस्था अध्यक्ष गौरी बालापुरे ने बताया कि जिले के समाजसेवी भी इस योजना से जुडऩे लगे है। 
मदद के लिए आगे आए समाजसेवी, संस्थाएं
आटो एम्बूलेंस योजना के तहत सड़क हादसों में घायल होने वाले ऐसे लोग जिनके साथ कोई परिजन नहीं होते तथा लावारिस हालात में पड़े रहने वाले ऐसे घायलों के लिए 108 या एम्बूलेंस का लंबा इंतजार करना पड़ता है। इन घायलों को यदि कोई भी ऑटो या टैक्सी चालक अस्पताल पहुंचाता है तो उसे समिति द्वारा सेवा शुल्क का भुगतान किया जाता है। समिति के इस कार्य से प्रभावित होकर जिले के समाजसेवी भी आर्थिक मदद कर रहे है। नगर पालिका अध्यक्ष अलकेश आर्य, ग्राम भारती महिला मंडल की अध्यक्ष भारती अग्रवाल, जी डी खण्डेलवाल मेमोरियल ट्रस्ट, समाजसेवी हेमंत पगारिया एवं अब आर डी पब्लिक स्कूल भी समिति द्वारा संचालित इस मुहिम से जुड़ गया है। समिति के कार्यों में प्रोत्साहन एवं सहयोग के लिए समिति अध्यक्ष सहित सचिव भारत पदम, उपाध्यक्ष रुपाली मालवीय, कोषाध्यक्ष पूनम जैन, सह सचिव नेहा दरवाई, वरिष्ठ सदस्य जमुना पंडाग्रे, महिमा ओनकर, पूजा दरवाई, शिखा बारस्कर, रितु यादव, ईश्वर सोनी, ऋषभ यादव, कमल डांगे, सुमीत नागले, सुदामा धोटे, संजय मालवीय सहित सभी ने आभार माना है। 


सीमेंट की सड़कों का बिछा जाल
फोरलेन और वार्डो में बनी सीमेंटेंड सड़कों ने बढ़ाई गर्मी
बैतूल। मिनी पचमढ़ी कहाने वाला बैतूल इन दिनों तेजी से गर्म होता जा रहा है। पहले यहा दिन का पारा 41 डिग्री होने के बाद भी रात की ठंडक सुकून देती थी लेकिन इन दिनों गर्मी की तपिश शाव व देर रात तक भी लोगों को सता रही है। जानकारों की माने तो सीमेंट-कांक्रीट की इमारतें और सड़कों के कारण गर्मी बढ़ रही है। यही वजह है कि देर रात तक गर्म हवाएं महसूस हो रही है। वहीं जिले में कई किलोमीटर तक बनी फोरलेन सड़क के लिए दी गई हजारों हरे-भरे वृक्षों की बलि भी धधकती गर्मी का बड़ा कारण है। 
शहर एवं ग्रामों में बढ़ती सीमेंट कांक्रीट की सड़को ने शहर की गर्मी बढ़ा दी है। बीते एक पखवाड़े से लगातार पारा 40 से 42 डिग्री पर झूल रहा है। जानकारों का कहना है कि गर्मी बढऩे में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से सीमेंट की सड़के जिम्मेदार है। दिन में कांक्रीट की सड़के गर्मी अवशोषित कर रात को उत्सर्जित करती है यही वजह है कि पहले जहां दिन में गर्मी के बावजूद रात को ठंउ का अहसास होता था अब शाम के समय भी सीमेंट की सड़कों के कारण गर्म हवा झोके महसूस होते है। 
दस वर्षों में तेजी से बढ़ी सड़के, डामर रोडो का चलन कम
मिट्टी में स्वाभाविक रुप से नमी होती है जिससे ठंडक स्वत: ही बाहर आती है। यही वजह है कि डामर की सड़के गर्मी सोख लेती है ओर उसे बाहर नहीं निकलने देती, जबकि कांक्रीट की सड़के दिन में गर्मी को सोखने के बाद देर रात उसे उत्सर्जित करती है। यही वजह है कि यदि मौसम में शाम को ठंडी हवा मौजूद भी हो तो सीमेंट की सड़कों की गर्मी के कारण ये हवाएं भी गर्म हो जती है। इसी करण लोग देर रात तक गर्म थपेड़े झेलने विवश है। गौरतलब है कि पिछले दस वर्षों में शहर और ग्रामों में सीसी रोड का जाल सा बिछ गया है जिसके कारण गर्मी में भी इजाफा हुआ है। 
बहुत कम जगह बची मिट्टी
जिला मुख्यालय के अलावा सभी क्षेत्रों में पिछले दस वर्षों में तेजी से विकास हुआ है। उसके साथ ही सीमेंट व कांक्रीट की इमारतों का भी फैलाव हुआ। सड़कों व फुटपाथों के पान पर पहले कुछ मिट्टी व डामर की सड़के हुआ करती थी लेकिन सीमेटेंड सड़कों के कारण यह भी खत्म हो गई। आम तौर पर सीमेंट की सड़के बनाने के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि सड़क के दोनों ओर कुछ हिस्से में कच्ची जगजह छोड़ी जाए। पैदल चलने वालों के लिए इस पर भी पैव्हर ब्लॉक लगा दिए जाते हे। नियमानुसार इन ब्लॉक को सिर्फ सेट किया जाना चाहिए लेकिन कई स्थानों पर पैव्हर ब्लॉक लगाने के बाद भी उन्हें सीमेंट से जोड़ दिया जाता है। ऐसे में पानी के जमीन में जाने के रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते है। और धरातल की गर्माहट बढ़ती जाती है। 
वॉकिंग के लिए नुकसानदायक
सीमेंट की सड़के सिर्फ वातावरण की गर्मी ही नहीं बढ़ा रही, डामर की सड़क के मुकाबले सीमेंट की सड़क पर चलने वाले वाहनों के टायर जल्दी घिसते है। सीमेंटेड सड़क चलने में आरामदायक भी नहीं होती। इतना ही नहीं इस सड़क पर नंगे पैर दौडऩा या वॉक करना भी नुकसानदायक माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सीमेंट की सड़क पर दौडऩे से घुटनों के खराब होने की आशंका रहती है। 
शहर की स्थिति
बैतूल शहर 25 स्क्वेयर किलो मीटर क्षेत्र में बसा हुआ है। नगर पालिका से मिली जानकारी के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड में करीब 60 प्रतिशत सड़के सीमेंटेड है। गौरतलब है कि डामरीकृत सड़कों के कम होते चलन के कारण गर्मी की प्रताडऩा शहरवासियों को झेलना पड़ रहा है। वहीं समीपस्थ नगर परिषद बैतूलबाजार में करीब 8 किमी में सड़के सीमेट्रीकृत हो चुकी है। 


पिता का हत्यारा पुलिस गिरफ्त में
बैतूल। सारनी क्षेत्र के ग्राम डांगवा में एक सनकी बेटे ने अपने ही पिता पर फावड़े से ताबड़तोड़ हमला कर हत्या कर दी थी। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने हत्या करने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। सारनी थाना प्रभारी विक्रम रजक ने बताया कि ग्राम डांगवा में 8 अप्रैल को पारिवारिक विवाद के चलते शेरसिंह पिता सुम्मर बेठे(35) ने अपने पिता सुम्मर बेठे पिता श्यामलाल (70) पर फावड़े से हमला कर दिया था। जिसे गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल भर्ती किया था। 17 अप्रैल को इलाज के दौरान सुम्मर ने दम तोड़ दिया। परिजनों की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ धारा 302 का मामला दर्ज किया था। घटना के बाद आरोपी फरार चल रहा था। पुलिस अधीक्षक राकेश जैन ने मामले को गंभीरा लेते हुए आरोपी को पकडऩे टीम गठित की। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी ग्राम बांसपुर में मौजूद है। पुलिस टीम ने गांव में पहुंचकर घेराबंदी करते हुए हत्या करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ करने पर आरोपी ने बताया कि उनके पिता से पारिवारिक विवाद हो गया था और इसी विवाद के चलते उन्होंने गुस्से में फावड़ा से हमला करा पिता की हत्या कर दी। आरोपी को पकडऩे सारनी एसडीओपी शशिप्रकाश दुबे, थाना प्रभारी विक्रम रजक, सहित पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 



जिला अस्पताल में एक वर्ष में 46 सौ प्रसव
महिला डॉक्टर कम होने के बावजूद रचा कीर्तिमान
बैतूल। जिला अस्पताल भले ही अव्यवस्थाओं के चलते सूर्खियों में रहा हो, लेकिन अस्पताल की महिला डॉक्टरों ने डॉक्टरों की कमी के बावजूद भी कीर्तिमान हासिल किया है। यह जिलेवासियों के लिए  गौरव की बात है। जिसमें गरीब तबके के लोगों को सबसे अधिक फायदा हुआ। अधिकतर देखा जाता है कि जिला अस्पताल में कमजोर वर्ग के लोग ही प्रसव के लिए जिला अस्पताल में अधिक भर्ती होते है। जिला अस्तपताल में एक वर्ष में कुल 46 सौ प्रसूताओं का प्रसव हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2016 से लेकर 1 अप्रैल 2017 तक जिला अस्पताल में कुल 46 प्रसूताओं का प्रसव किया गया। जिसमें से ज्यादातर महिला ऐसी है जिनका सीजर का सफलतम ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों की कमी के बावजूद भी इतनी संख्या में अस्पताल में प्रसव हो पाया है। उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में कुल 4 महिला डॉक्टर पदस्थ है। जिनके भरोसे डिलेवरी वार्ड की पूरी जिम्मेदारी है और महिला डॉक्टरों ने बखूबी जिम्मेदारी निभाई है। जिले की जनसंख्या को देखते हुए शासन की ओर से जिला अस्पताल में एक वर्ष में कुल 17 सौ प्रसव होना सुनिश्चित किया गया था, हालांकि इसका कोई टारगेट नहीं दिया गया। 17 सौ प्रसव सुनिश्चित किया गया था, लेकिन अस्पताल में 17 सौ की जगह 46 सौ  प्रसव हुए। आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पताल में एक वर्ष में अनुमान के मुताबिक दोगुनी से अधिक संख्या में प्रसव हुए है।
8 डॉक्टरों की आवश्यकता
जानकारी के मुताबिक जिले की जनसंख्या को देखते हुए जिला अस्पताल में 17 सौ प्रसव पूरी करने के लिए 8 महिला डॉक्टरों का होना आवश्यक है, लेकिन जिला चिकित्सालय में 4 महिला डॉक्टर मौजूद है। इसके बावजूद भी अस्पताल में महिलाओं का दोगुना प्रसव हुए है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिला डॉक्टरों ने अपनी जवाबदारी को बखूबी निभाया है। हालांकि जिला अस्पताल में महिला डॉक्टरों पर लापरवाही किए जाने के भी आरोप लगे है, आरोपों के बावजूद भी महिला डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी। 
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से अस्पताल में करते है रेफर
जिले में कई जगह पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए है, ताकि महिलाओं की नार्मल प्रसव उन्हीं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हो सके, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टर प्रसव को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते है। नार्मल प्रसव होने के बावजूद भी प्रसूताओं को सीधा जिला चिकित्सालय में रेफर कर जवाबदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है। जबकि प्रसव को लेकर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टरों को उच्च डॉक्टरों के द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जाता कि नार्मल प्रसव और सीजर प्रसाव से कैसे निपटा जा सके। इसके बावजूद भी डॉक्टर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में रिस्क नहीं लेना चाहते है। जिसकी वजह से जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों के ऊपर प्रसव के लिए अधिक बोझ़ बढ़ जाता है। 
इनका कहना
डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के चलते जिला अस्पताल में इतने प्रसव हो पाए है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के बावजूद भी इतने प्रसव होना बड़ी बात है। 
डॉ अशोक बारंगा, सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय, बैतूल

बैतूल का मीडिया काफी जागरूक है, यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं। जागरूकता के प्रमाण समय-समय पर देखने को मिल चुके हैं। फिलहाल बात झीटूढाना की अनिता नर्रे से जुड़ी हुई है। इस साहसी महिला ने पांच वर्ष पहले विवाह के ठीक दूसरे दिन केवल इसलिए ससुराल छोड़ दिया था, क्योंकि यहां शौचालय नहीं था। लज्जित महसूस होने के बाद आदिवासी समाज में किसी महिला का इस तरह ससुराल छोडऩा परंपराओं के खिलाफ था, लेकिन उसके साहस के आगे परंपराएं बौनी साबित हो गई। ससुराल वालों को नई नवेली बहू का विद्रोह (घर से जाने का तरीका) ठीक लगा। आनन फानन में ससुराल वालों ने शौचालय का निर्माण करवाकर अपनी बहू को घर भी वापस बुलवा लिया। बची कसर बैतूल के मीडिया कर्मी संजय शुक्ला ने पूरी कर दी। वर्ष 2012 में नवदुनिया में कार्यरत शुक्ला ने आदिवासी महिला की साहस भरी दास्तान की खबर को खोजी खबर के तहत निकाला। पांच वर्ष पहले प्रिंट मीडिया में काफी चकाचौंध थी। निगेटिव खबरों को प्रमुखता से स्थान मिलता था, लेकिन पाजीटिव खबरें स्थान नहीं पाती थी। अंर्तमन में कई सवाल आने के बाद इस खूबी से इस खबर को पहले निकाला और दो घंटे की मेहनत के बाद भोपाल भेजा तो उनका मन आशंकित था कि क्या इस खबर को स्थान मिल पाएगा कि नहीं? लेकिन अगले अंक में आदिवासी महिला के साहस की खबर नवदुनिया (नईदुनिया) के सभी एडिशनों में प्रकाशित हुई तो खबर का गढऩे वाले और ससुराल छोडऩे वाली इस महिला दोनों ने खूब प्रशंसा बटोरी। खबर की खबर तब बनी जब स्वच्छता अभियान को लेकर देश भर में अलख जगाने वाले सुलभ इंटरनेशनल जैसे एनजीओ ने बैतूल आकर झीटूढाना की महिला का उसी के गांव में सम्मान किया। महिला के साहस के बाद उसके परिजनों को भी उतना ही सम्मान मिला। खबर गढऩे वाले मीडिया कर्मी संजय शुक्ला, नईदुनिया ग्रुप को सुलभ इंटरनेशनल के मुखिया बिंदेश्वर पाठक ने ढाई-ढाई लाख रूपए पुरस्कार देने की घोषणा की। यह घोषणा जिले के मीडिया के लिए बहुत बढ़ी खबर थी। पूरा मीडिया जगत सुलभ इंटरनेशनल की घोषणा से उत्साहित था। सम्मान का सिलसिला बैतूल से लेकर देश की राजधानी नईदिल्ली तक नहीं थमा, लेकिन पुरस्कार की राशि पांच वर्षों तक शुक्ला को नहीं मिली। यह तो शुक्र है अक्षय कुमार नीत टायलेट एक प्रेम कथा की पड़ोसी जिले होशंगाबाद में शूटिंग हुई। इस बार भोपाल नवदुनिया के डिप्टी न्यूज एडीटर भोजराज उच्चसरे की पारखी नजरों ने इस खबर को लपक लिया। उन्होंने जिस ढंग से झीटूढाना की अनिता नर्रे और खबर प्रकाशित करने वाले संजय शुक्ला को टायलेट एक प्रेम कथा से जोड़कर पुरानी यादें ताजा की, यह अच्छी पहल थी। सोशल मीडिया पर पुरस्कार न मिलने की पीढ़ा भी व्यक्त कर दी गई। यही बात भोजराज जी को छू गई और उन्होंने अगले अंक में सुलभ इंटरनेशनल को याद दिलाकर खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित कर दी। राजधानी नईदिल्ली के अंक में भी खबर को स्थान मिला। नतीजा अगले दिन सबके सामने था। सुलभ इंटरनेशनल ने अप्रैल माह में पुरस्कार देने की घोषणा कर दी। चार दिन पहले सूचना मिली और कल 24 अप्रैल को वह दिन भी करीब आ गया जब आदिवासी महिला की साहस की खबर को निकालकर प्रकाशित करने वाले संजय शुक्ला को पुरस्कार की राशि के साथ सुलभ इंटरनेशनल स्वच्छता पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। 
इसे संयोग ही कहें कि पुरस्कार लेने जिन तीन मीडिया कर्मियों को सुलभ इंटरनेशनल ने नईदिल्ली आमंत्रित किया है, उनमें सभी हमारी माटी बैतूल के ही हैं। संजय शुक्ला फिलहाल एक स्थानीय दैनिक में एडिटोरियल चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो अल्प समय में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में अपनी धाक जमा चुके आनंद पाण्डे नवदुनिया (नईदुनिया) मध्यप्रदेश के संपादक होने के नाते ढाई लाख रूपए का पुरस्कार ग्रहण करेंगे। आनंद पाण्डे बैतूल शहर के लिंक रोड के ही निवासी हैं। तीसरे मीडिया कर्मी भोजराज उच्चसरे हैं, जिन्होंने पुरस्कार दिलाने में अपनी महती भूमिका निभाई। संयोग से वे भी बैतूल के खंजनपुर के रहने वाले हैं। कुल मिलाकर 24 अप्रैल को नईदिल्ली में दिग्गजों की मौजूदगी में पुरस्कार समारोह बैतूल का ही बोलबाला रहेगा। बैतूल के इन तीनों मीडिया कर्मियों  ने बैतूल का गौरव, सम्मान बढ़ाया है। तीनों को शुभकामनाएं .....।

दस दिनों बाद सुधरी मोटर अगले ही दिन फिर खराब
शहर के कई वार्डो में गहराया जलसंकट, पानी के लिए हायतौबा
फोटो
बैतूल। गर्मी तेज होने के साथ जलसंकट भी उतनी ही तेजी से गहराने लगा है। हालत यह है कि शहर के एक दर्जन से अधिक वार्डो में स्थिति गंभीर होते जा रही है। कोठीबाजार के मोक्षधाम के पास पिछले दस दिनों से खराब हुई मोटर सुधारने के लिए नगरपालिका लेकर गई। रविवार को मोटर सुधारकर लगाई, लेकिन दोबारा खराब हो गई। इससे लगभग आधा दर्जन वार्डो में भीषण जल संकट मंडरा गया है। उधर क्षेत्र की लोहिया वार्ड में दस दिनों से नल न आने के कारण लोग परेशान हो गए है। ओझाढाना के लोग पीने का पानी स्टेशन से लेकर आ रहे है।
पर्याप्त बारिश होने के बावजूद इस बार शहर में  इस बार पानी का संकट ज्यादा दिखाई दे रहा है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का न लगाना और मकान, शासकीय कार्यो में पानी का बेजा दोहन करना इसकी मुख्य वजह है। शहर के कोठीबाजार क्षेत्र में हालत बेकाबू है। गांधी वार्ड के स्वीपर मोहल्ले में मोक्षधाम के पास ट्यूबवेल से पानी सप्लाई होता है। यहां की मोटर पिछले दस दिन पहले जल गई थी। नगरपालिका को जानकारी मिलने पर मोटर सुधारने के लिए किसी सिम्मैया की दुकान पर भेजी गई। दस दिनों में मोटर सुधकर नहीं आई जब यहां पानी का संकट गहराया तो लोगों ने नगरपालिका में हल्ला मचाया। आनन-फानन में शनिवार शाम को मोटर सुधाकर लगाई गई। रविवार जैसे ही मोटर शुरू की गई कुछ देर बाद दोबारा खराब हो गई। मोटर खराब होने से नगरपालिका की जलशाखा के कर्मचारियों के हाथ पैर फूल गए। आनन-फानन में दोबारा मोटर को सुधरने के लिए भिजवाया गया है। गांधी वार्ड के इस क्षेत्र में नगरपालिका के स्वीपर लोग निवास करते है। डेढ़ सौ परिवार हर दिन शहर में नाली साफ कर जब घर पहुंचते है तो नहाने के अलावा पीने तक का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। इससे यहां के लोगों को परेशानियां हो रही है। हालत यह है कि शिकायत करने के बाद भी टैंकर नहीं भेजे जा रहे है।
मोटर सुधारने के नाम औपचारिकता
नगरपालिका द्वारा पहले एक ट्यूबवेल की मोटर खराब होने के बाद दूसरी मोटर तत्काल ट्यूबवेल में लगा दी जाती थी। इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। जल शाखा मोटर खराब होने की शिकायत पर उसे सुधारने भेज रही है। इसके बावजूद चंद दिनों में दोबारा मोटर खराब हो जा रही है। सूत्र बताते है कि मोटर को रिपेयरिंग करने के बाद वारंटी से सुधारा जाता है फिर भी दोबारा नगरपालिका को इसका भुगतान करना पड़ रहा है। कई लोगों ने नगरपालिका की जलशाखा के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत पर भी अंगुलियां उठाई है। 
लोहिया वार्ड में दस दिनों से नहीं आया नल
शहर के गंज क्षेत्र की स्थिति बदत्तर हो गई है। वार्ड के ओझाढाना क्षेत्र में दस दिनों से नल नहीं आए है। यही स्थिति माचना नगर में है। ओझाढाना की कांता बाई ने बताया कि पानी नहीं मिलने से दैनिक उपयोग के लिए स्टेशन से पानी ला रहे है। यही के अनिल ने बताया कि झुग्गी झोपड़ी में अपना गुजर बसर कर रहे है। उनका आरोप है कि कोई बड़ी कालोनी रहती तो अब तक ट्यूबवेल खनन करवा दिया जाता, लेकिन नगरपालिका ने कोई ध्यान नहीं दिया। वार्ड के पार्षद विशाल धुर्वे का कहना है कि वे सोमवार इस मामले में सीएमओ से चर्चा कर समस्या का निदान करेंगे।

बाईक चोरों का आतंक, दो दिन में तीन गाडिय़ां चोरी
बैतूल। बाईक चोर गिरोह ने जिले में आतंक मचाकर रखा है। नागरिक भी इन चोर गिरोह से परेशान है। हालांकि पुलिस इस चोर गिरोह को जल्द पकडऩे की बात कह रहे है। मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार माझी नगर और जामठी क्षेत्र से अज्ञात आरोपियों द्वारा बाईक चोरी कर ली। रविवार के दिन बस स्टेण्ड से एक मोटर साईकिल चोरी कर ली। जिसकी शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई। दो दिन में तीन मोटरसाईकिल चोरी होने की वारदात सामने आई है। कोतवाली थाना प्रभारी एसआर झा ने बताया कि पुलिस बाईक चोर गिरोह को पकडऩे के लिए सक्रिय है। जल्द ही बाईक चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर लिया जाएगा। पुलिस ने कुछ संदिग्ध आरोपियों से पूछताछ भी कर रही है। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार हो रही बाईक चोरी की वारदात से लोगों में दहशत व्याप्त है। वाहन जरा भी लापरवाही से खड़ा किया गया तो चोर  मौका देखकर वाहनों पर हाथ साफ कर रहे है।
बाघ की बिसरा रिपोर्ट जबलपुर भेजी
भोपाल। शिकारियों की गोली का शिकार होने के बाद शुक्रवार दरमियानी रात दम तोड़ चुके बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सोमवार तक आने की संभावना है। वन विहार में कल तीन डॉक्टरों की टीम ने बाघ का पोस्ट मार्टम किया था। पोस्टमार्टम के बाद बिसरा जबलपुर भेज दिया गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भोपाल आ जाएगी। रिपोर्ट आ जाने के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि बाघ की मौत कैसे हुई है।
3 डिग्री गिरा तापमान, मिली राहत
बैतूल। उत्तर भारत से ठंडी हवाए चलने के कारण तापमान में गिरावट आई है। तापमान में गिरावट आने से जिलेवासियों को गर्मी से कुछ हद तक राहत मिली है। मिली जानकारी के मुताबिक रविवार को तापमान में तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। रविवार का न्यूनतम तापमान 38 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि शनिवार का तापमान 41 डिग्री दर्ज किया गया था। उल्लेखनीय है कि तापमान 42 डिग्री पर जाने के कारण जिलेवासियों को प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। तेज धूप के कारण बिना गमछे, चश्मे और छाते के चलना मुश्किल हो गया था यहां तक की तेज गर्मी को देखकर स्कूलों के समय में परिवर्तन करना पड़ा था। तापमान में आई गिरावट के कारण जिलेवासियों को कुछ हद तक राहत मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले समय में जिलेवासियों को और अधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा।

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