नवीन तातेड़ को मातृशोक
बैतूल। स्व. श्री मोतीलाल तातेड़ की धर्मपत्नि एवं इंदरचंद , सुगनचंद, भागचंद तातेड़ की भाभीजी एवं मामाजी ज्वेलर्स के संचालक नवीन कुमार तातेड़ की माताजी का 75 वर्ष की आयु में दुखद निधन हो गया। श्रीमती तातेड़ की गत रात्रि 3 बजे अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें लश्करे चिकित्सालय ले जाया गया था। जहां उन्होंने अंतिम सांसे ली। अंंतिम यात्रा उनके कोठीबाजार स्थित निवास से दोपहर 1 बजे निकाली गई और अंतिम संस्कार कोठीबाजार मोक्षधाम में किया गया। अंतिम यात्रा में शहर के सभी व्यापारी, समाजसेवी, गणमान्य नागरिक सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
जिले के सृजनधर्मियों को मिलेगा शतकवीर सम्मान
4 साहित्यकारों को रचनाकार सम्मान से नवाजेगा रायपुर
बैतूल। साहित्य सृजन के क्षेत्र में बैतूल जिले के साहित्यकारों, सृजनधर्मियों ने यहां की ख्याति जिले से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाई है। यहां के कवियों ने लाल किले के प्राचीर से भी समय-समय पर कविता पाठ कर बैतूल को गौरव दिया है। तो लोक संस्कृति से जुड़ी रचनाओं एवं सम सामयिक रचनाओं के माध्यम से देशकाल और परस्थिति के साथ-साथ अपना पक्ष रखा है। ऐसी ही दो कवियत्रियों को 23 अप्रैल को एमजीएसएम साहित्यक संस्था द्वारा शतकवीर सम्मान से नवाजा जाएगा। वहीं चार रचनाकार रायपुर में रचनाकार सम्मान से मई माह में सम्मानित किए जाएंगे। जिले के साहित्य सृजनधर्मियों के साथ-साथ यह बैतूल के लिए भी बड़ी उपलब्धी है।
दूसरी बार शतकवीर बनी मंजू
एमजीएसएम साहित्यक संस्था द्वारा देश के रचनाकारों से साहित्यक विधाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रचनाएं आमंत्रित की जाती है। इस संस्था द्वारा रचनाकारों से एक दूसरे की रचनाओं का पाठ कराने के बाद वोटिंग कराई जाती है और वोटिंग के आधार पर केटेगरी दी जाती है। सौ वोट पर ग्रीन कार्ड एवं इसी तरह यलो एवं रेड कार्ड दिए जाते है। जिस रचनाकार को ग्रीन कार्ड मिलता है संस्था द्वारा उसे शतकवीर सम्मान से सम्मानित किया जाता है। बैतूल जिले की साहित्यक संस्था सृजन साहित्य कुंज व बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति की सक्रिय सदस्य एवं रेलवे विभाग बैतूल में पदस्थ मंजू लंगोटे प्रसाद को यह पुरुस्कार दूसरी बार मिलेगा। इसके अलावा मुलताई की प्रखर रचनाकार स्वाति सोनी मानसी को पहली बार शतकवीर सम्मान से 23 अप्रैल को दोपहर दो बजे से नेहरु युवा केन्द्र में आयोजित सम्मान समारोह में इस पुरुस्कार से नवाजा जाएगा।
रचनाकारों का रचनाकार सम्मान रायपुर में
जिले के कई अन्य कलाकारों का चयन राज कला साहित्यक समिति रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा रचनाकार सम्मान के लिए किया है। जिले के कुछ कलाकारों से बेटी विषय पर दो-दो रचनाएं समिति द्वारा आमंत्रित की गई थी। जिसके आधार पर रचनाकारों का चयन रचनाकार सम्मान के लिए किया गया। जिले के वरिष्ठ एवं लोक कलाकार रामचरण यादव, अलका बढि़ए, डीएन तिवारी एवं मंजू लंगोटे प्रसाद का चयन रचनाकार सम्मान के लिए किया गया है। मई माह में इन रचनाकारों को सम्मानित किया जाएगा।
विभागों में हजारों लीटर पानी निर्माण कार्यो पर अपव्यय
शहर से लेकर गांव तो लोगों को पीने का पानी नहीं हो रहा नसीब
विभाग के अधिकारी को जलसंकट से मलाल नहीं
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बैतूल। धरातल में तेजी से पानी नीचे जाने के बाद पूरे जिले भर में पेयजल संकट गहरा गया है। कलेक्टर ने भले ही 30 जून तक खनन पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि शासकीय विभागों के ही दर्जनों बड़े प्रोजेक्टों का काम इन दिनों जोरशोर से चल रहा है। इसमें हजारों लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे समय जब शहर से लेकर गांव तक पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है और सरकारी कामों के लिए हजारों लीटर पानी उपयोग किया जा रहा है। निर्माण कार्य इसी तरह चलते रहे तो आगामी मई और जून के माह में कई अंचलों में बूंद-बूंद पानी को लोग तरस जाएंगे। विभाग के अधिकारियों को इस बात का कतई मलाल नहीं है।
शहर में पिछले दिनों पेयजल संकट के बाद नगरपालिका ने मोटर से पानी लेने पर प्रतिबंध लगाया है। इसका अभी असर शुरू नहीं हुआ है। अलबत्ता शहर के अलावा जिले के कई अंचलों में बड़े प्रोजेक्टों का कार्य जोरशोर से चल रहा है। इसमें हर दिन हजारों लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। ठेकेदार अनुबंध और अपने स्तर पर पानी के लिए व्यवस्था करने में लगे हुए है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस बात से कोई मलाल नहीं है कि जिले में पेयजल संकट गहराया हुआ है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। दूसरी ओर निर्माण कार्यो के लिए कंपनी के ठेकेदारों ने मनमर्जी से सैकड़ों फीट बोर खनन करवा लिए है। शेष व्यवस्था निजी कूपों से करवाई जा रही है। बड़े प्रोजेक्टों पर हजारों लीटर पानी लगने के बाद स्थिति गड़बड़ा सकती है।
अधिकारियों का ध्यान ही नहीं
ताज्जुब की बात यह है कि जिले में पानी का संकट मार्च माह से ही गहरा गया है। बीते वर्ष हालांकि सामान्य बारिश का आंकड़ा जिले में पूरा हो गया था, लेकिन कुछ ब्लॉकों में बारिश होने के बाद भी हालत बेकाबू हो गई है। मुलताई, प्रभातपट्टन, आठनेर ब्लॉक में स्थिति काफी दयनीय है। इसके बावजूद बड़े निर्माण कार्य हर विभागों में चल रहे है। मसलन वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, आरईएस जैसी बड़ी निर्माण एजेंसियों में टेंडर आवंटित करने के पहले कतई नहीं सोचा था कि गर्मी में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचेगी और निर्माण कार्यो को इस सीजन में भी चालू रखने से लोगों को दिक्कते होगी। अब अधिकारी निर्माण कार्य में लगने वाले पानी को लेकर अपना बचाव करते नजर आ रहे है। सभी विभाग के अधिकारी इस बात का पल्ला ठेकेदार पर झाड़कर इतिश्री कर रहे है।
अभी नहीं चेते तो हालत बेकाबू
सूत्रों की माने तो जिस लिहाज से जिले में आधा दर्जन बड़े प्रोजेक्टों का काम इन दिनों जोरशोर से चल रहा है। यहां औसतन हर दिन करीब दस हजार लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। यह पानी ट्यूबवेल, कुएं, निजी लोगों से ठेकेदार क्रय कर रहे है। गर्मी तेज होने के साथ पानी की डिमांड निर्माण कार्यो में बढ़ते जा रही है। ऐसी स्थिति में आने वाले समय में निर्माण कार्य चलने वाले क्षेत्र के आसपास गंभीर पेयजल संकट गहराने के आसार दिखाई दे रहे है। यदि इसी तरह निर्माण कार्यो पर पानी का उपयोग किया गया तो हालत बेकाबू हो सकते है। लोगों की राय है तो तेज गर्मी के कारण निर्माण कार्यो को बंद कर देना चाहिए, इससे हजारों लीटर पानी यहां जाने की वजह आने वाले समय में क्षेत्र के लोगों के उपयोग में आ जाएगा।
इनका कहना
निर्माण कार्यो में पानी के उपयोग को लेकर जानकारी हासिल की जाएगी। वास्तव में यह ज्वलंत प्रश्र है। इस पर शीघ्र ही निर्णय लिया जाएगा।
सौरभ कुमार सुमन, प्रभारी कलेक्टर, बैतूल
प्रभारी कलेक्टर बोले बैतूल में 12 बजे तक नहीं होती गर्मी
भरी दोपहर में ही स्कूल से घर लौटेंगे बच्चे
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बैतूल। पूरा प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है। भोपाल जैसे शहर में जहां पारा 43 डिग्री को छू रहा है वहीं बैतूल में भी पारा यह आकड़ा छूने बेताब है। ऐसे में जिले के नौनिहाल तपती धूप में स्कूल जाने को विवश है। जहां दीगर जिलों में भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों की छुट्टिया घोषित कर दी गई वहीं बैतूल जिले में तापमान 42 डिग्री पर पहुंचने के बाद भी जिले के प्रभारी कलेक्टर इसे प्रचंड गर्मी न मानते हुए दोपहर 12 बजे तक हर हाल में स्कूल लगाने का आदेश जारी कर चुके है। हालात यह है कि जहां बच्चे दोपहर 12 बजे चिलचिलाती धूप में घर लौटने विवश है वहीं प्रशासनिक मुखियां का यह कहना कि बैतूल में 12 बजे तक गर्मी नहीं लगती समझ से परे है। प्रभारी कलेक्टर के इस आदेश के पीछे एक वजह यह भी हो सकती है कि एसी-कूलर लगे कमरों में बैठने वाले अधिकारियों को वैसे भी भीषण गर्मी का पता नहीं चलता। शायद उनके द्वारा भी वातानुकूलित कमरे में बैठकर गर्मी की भीषणता का कम आकलन करते हुए 12 बजे तक स्कूल लगाने का आदेश जारी कर दिया है। यदि यही हाल रहा तो धधकते सूरज की चपेट में आने से नौनिहाल लू लगने सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आ सकते है। इस समय जब लोग दोपहर में घर से निकलने से कतराते है। सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है ऐसे में मासूम बच्चे भरी दोपहरी में घर लौट रहे है।
भोपाल से बैतूल की नहीं कर सकते तुलना
बैतूल जिले में तापमान 42 डिग्री के आसपास झूल रहा है, लेकिन स्कूली बच्चों की छुट्टी को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से यह तापमान बैतूल की हरियाली को देखते हुए ज्यादा नहीं है। जबकि इस तापमान पर भोपाल सहित अन्य जिलों में बच्चों की छुट्टियां घोषित कर दी है, लेकिन प्रभारी कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन का अन्य जिलों की तर्ज पर बैतूल में स्कूलों की छुट्टी की घोषणा करने का कोई इरादा फिलहाल नहीं है। चर्चा के दौरान श्री सुमन ने बताया कि भोपाल और बैतूल की गर्मी की तुलना नहीं कर सकते। बैतूल में पेड़ पौधे, हरियाली बहुत है इसलिए दोपहर 12 बजे तक गर्मी का पता नहीं चलता। यदि भविष्य में गर्मी बढ़ती है तो इस संबंध में विचार किया जा सकता है। अभी जो स्कूल दोपहर 12 बजे के बाद भी लग रहे है उनका समय बदलकर 12 बजे तक करने के आदेश जारी किए जा रहे है। गौरतलब है कि दोपहर में उमस की भयावहता अधिक रहती है। ऐसे में बच्चों को लू लगने और डायरिया होने की आशंका बढ़ जाती है।
स्कूलों का तानाशाह रवैया
जिला मुख्यालय पर करीब पांच सीबीएससी पैटर्न के स्कूल संचालित हो रहे है। यहां गर्मी को देखते हुए प्रबंधन द्वारा जहां कक्षा 1 से 3 तक स्कूल दोपहर 12 से 12.30 तक संचालित किए जा रहे है। वहीं कक्षा 4 से 12 तक की कक्षाएं दोपहर डेढ़ से दो बजे तक लगाई जा रही है। गर्मी के तेवर इतने तीक्ष्ण है कि सुबह 8 बजे से ही धूप चुभने लगती है। ऐसे में नौनिहालों को स्कूल लगाया जाना ही बेमानी है। गत वर्ष की बात करें तो भीषण गर्मी में स्कूलों के समय में फेरबदल के बावजूद कुछ निजी स्कूल लगाए जा रहे थे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि भले ही स्कूलों के समय में दोपहर 12 बजे तक का बदलाव किया गया है लेकिन तानाशाह स्कूल प्रबंधन प्रतिस्पर्धा के चलते इन नियमों की अनदेखी कर सकते है।
कुएं में उतर कर पानी भर रहे ग्रामीण
पेयजल के लिए मचा हाहाकार
खेड़ीसांवालीगढ़। इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप है, ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति को पानी की आवश्यकता बढ़ जाती है। भीमपुर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत चूना लोमा, बेहड़ाढाना गांव के हालात पेयजल संकट से इतने बदतर हो गए है कि ग्रामीणों को अब कुएं के भीतर उतरकर बचे पानी को सहेज कर प्यास बुझानी पड़ रही है। बेहड़ाना के ग्रामीणों ने बताया की गांव में पीने के पानी के लिए दो कुएं है। दोनों ही सूख गए हैं। हेण्डपंप सभी बंद है भूजल स्तर पाताल में चला गया है। ऐसी स्थिति में पीन के पानी के लिए ग्रामीण सार्वजनिक कूप से पानी भरते है। कुएं में सिर्फ छोटा सा डबरा भरता है। उसे रस्सा बाल्टी की मदद से नहीं निकाला जा सकता। इसलिए पुरूष महिलाएं कुएं में बाल्टी उतारकर खुद भी उतर जाते हैं। मटमैले पानी को छानकर फिर गुण्डी को रस्सी से उपर खींचकर पानी भरते हैं। यही हाल चूनालोमा गांव का है। यहां संचालित नल जल योजना के पम्प हाउस में ताला डला है। ग्राम पंचायत द्वारा बोर में भरपूर पानी उपलब्ध होने के बावजूद भी शुरू नहीं किया जा रहा है। खामढाना, तोगाढाना में भी पेयजल संकट से हाल बेहाल है। चूनालोमा के ग्रामीणों के अनुसार नल योजना यहां महज शोपीस बनी हुई है। ग्राम पंचायत की इस योजना को चलाने में कोई रूचि नहीं है। पेयजल संकट के कारण आदिवासी पानी जुटाने में ही अधिक समय व्यतीत करत हैं। जिससे उनकी मजदूरी भी नहीं मिल रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उचित कार्यवाही की मांग की है।
एक माह में तीन लाख क्विंटल गेहूं की खरीदी
बैतूल। गेहंू के समर्थन मूल्य में खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी चल रही है। खरीदी की रफ्तार को देखते हुए टारगेट को पूरा करना असंभव लग रहा है। एक महीने में तीन लाख क्विंटल गेहूं की खरीदी की गई। जबकि इस बार शासन ने जिले को 10 लाख क्विटंल गेहूं खरीदी का लक्ष्य दिया है। अभी तक टारगेट के मुताबिक आधी भी खरीदी नहीं हो पाई है। खरीदी के लिए एक माह का समय शेष रह गया है। जिला विपणन अधिकारी संजय गीते ने बताया कि जिले में 20 मार्च से समर्थन मूल्य में गेहंू की खरीदी प्रारंभ हुई थी। खरीदी प्रारंभ हुए एक माह का समय पूरा हो चुका है। खरीदी के लिए 74 खरीदी केन्द्र बनाए गए थे। सभी खरीदी केन्द्रों पर खरीदी प्रारंभ हो गई है। 5 हजार 18 किसानों से तीन लाख क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। समर्थन मूल्य में गेहूं की खरीदी 20 मई तक किए जाना है। खरीदी को देखते हुए शासन द्वारा दिए गए टारगेट को पूरा करना संभव नहीं दिख रहा है। अभी तक 11 हजार किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए खरीदी केन्द्रों पर नहीं लाई है। बार- बार मैसेज करने के बावजूद किसान खरीदी केन्द्र पर नहीं पहुंच रहे है। सोसायटियों से लिए गए कर्ज काटे जाने के डर से किसान समर्थन मूल्य में उपज बेचने से किनारा कर रहे है।
सर्वर ठप, उपभोक्ताओं को नहीं मिला राशन
74 प्रतिशत आधार लिंक कार्य पूर्ण
बैतूल। सर्वर ठप्प होने के कारण बुधवार कई उपभोक्ताओं को राशन दुकानों से खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। इन दिनों राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं के आधार कार्ड लिंक करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। बिना आधार कार्ड लिंक किए उपभोक्ताओं को राशन नहीं दिया जा रहा है। जिला आपूर्ति अधिकारी डीएस मुजाल्दा ने बताया कि जिले में कुल 592 राशन दुकानें संचालित की जा रही है और जिले भर में कुल 12 लाख 39 हजार 70 उपभोक्ता है। जिनका आधार कार्ड लिंक किया जा रहा है। अभी तक कुल 9 लाख 26 हजार 83 उपभोक्ताओं के आधार कार्ड लिंक कर दिए गए है। आधार लिंक का कार्य 74 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। 26 प्रतिशत आधार लिंक का कार्य शेष बचा है। यह भी अतिशीघ्र पूर्ण कर दिया जाएगा। बुधवार को आधार लिंक का कार्य चल रहा था, लेकिन अचानक सर्वर ठप्प हो जाने से आधार लिंक का कार्य प्रभावित हो गया। यहां तक की उपभोक्ताओं को सर्वर ठप्प हो जाने के कारण राशन तक नहीं मिल पाया। उल्लेखनीय है कि सभी राशन दुकानों पर पीओएस मशीन के जरिए राशन वितरित किया जा रहा है। जिसमें उपभोक्ता को राशन के लिए अंगूठे का निशान लगाना अनिवार्य है और यह मशीन सर्वर पर चलती है। सर्वर ठप्प हो जाने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिला आपूर्ति अधिकारी श्री मुजाल्दा ने बताया कि सर्वर के कारण बुधवार को राशन दुकानों में आधार लिंक का कार्य और उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल पाया है। सर्वर आते ही सभी कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। आपूर्ति अधिकारी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि जिन उपभोक्ताओं ने आधार लिंक नहीं किए है वे अतिशीघ्र आधार कार्ड लिंक कर ले अन्यथा बिना आधार कार्ड के राशन नहीं दिए जाएगा। जिन उपभोक्ताओं के आधार कार्ड लिंक हो गए है केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को राशन दिया जा रहा है। बुधवार सर्वर ठप्प हो जाने के कारण राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ रही। घंटो तक सर्वर ठीक हो जाने का उपभोक्ता इंतजार कर रहे थे।
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