Fwd: news 21

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From: "राष्ट्रीय दिव्य दुनिया" <divyaduniya@gmail.com>
Date: 21 Apr 2017 20:57
Subject: Fwd: news 21
To: "Nawal Verma" <nawalpress@gmail.com>
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From: राष्ट्रीय दिव्य दुनिया <divyaduniya@gmail.com>
Date: 2017-04-21 8:26 GMT-07:00
Subject: news 21
To: Nawal Verma <nawalpress@gmail.com>


 सोसायटी में ताला देख उपाध्यक्ष हुए आग बबूला
खेड़ीसांवलीगढ़। अपने क्रिया कलापो को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाली आदिम जाति सेवा सहकारी समिति अब कि बार कार्यालीन कर्मचारियों की लापरवाही और लेटलतीफी को लेकर चर्चा में आ गयी है। आज सुबह 11 बजे समिति के उपाध्यक्ष सुदामा पाटनकर सोसायटी के दफ्तर किसी आवश्यक कार्य से पहुंचे तो पूर्व की भांति दफ्तर में ताला लगा देख आग बबूला  हो गये, उन्होने प्रबंधक अजाब राव कुंभारे को इसकी सूचना दी । तब आधा घंटा बाद गेंहू खरीदी केंद्र में व्यस्त प्रबंधक सोसायटी पहुंचे और दफ्तर स्वयं ने खोला उपाध्यक्ष सुदामा पाटनकर  ने बताया कि दफ्तर में आधा दर्जन से भी ज्यादा कर्मचारी पदस्थ है। लेकिन कार्यालिन समय में भी साप्ताहिक बाजार के दिन कार्यालय में ताला लगा हुआ था। उपाध्यक्ष का कहना है प्रबंधन तो रोज समय पर आते है लेकिन कर्मचारियों की वजह से दफ्तर इसी तरह संचालित होता है। उच्च अधिकारियों से कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है। 

नये ट्यूबवेल के पानी से बुझेंगी खेड़ीवासियों की प्यास
खेड़ीसांवलीगढ़। बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के प्रयास से ग्राम खेड़ीसांवलीगढ़ वासियों के प्यासे कंठो को तृप्त करने कराए गये ट्यूबवेल खनन में मात्र 300 फिट गहरे बोर खनन से 3 इंच पानी इस भीषण गर्मी में प्राप्त हुआ । जिससे खेड़ी की जल आपूर्ति में भरपूर सहायता मिलने की संभावना जताई जा रही है। वही 1800 फीट पाईप लाईन और ट्यूबवेल के मोटर पंप की आवश्कता भी कोई  चुनौती से कम नही थी। सरपंच सचिव के द्वारा बार-बार पीएचई दफ्तर के चक्कर काटने के बाद अन्तत: ग्रामीण मंडल आध्यक्ष गोगुल सिंह चौहान के द्वारा एक बार पुन: विधायक खंडेलवाल को समस्या से अवगत कराया गया और नल जल की सामग्री पाईप मोटर सभी उपलब्ध कर नये ट्यूबवेल को आरंभ कर दिया गया है। वही पाइप लाईन विछाने के कार्य में विलंब हो रहा है। जो हड़ताल से प्रभावित है। सरपंच का कहना है कि हर हाल में पाईप शीघ्र लगाए जावेंगे। 

विनय का बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर चयन 
बैतूल। हाल ही में एमपीपीएससी-2015 के रिजल्ट घोषित हुए जिनमें बैतूल कालापाठा निवासी विनय प्रकाश ठाकुर का बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर चयन हुआ है। गौरतलब है कि विनय प्रकाश ठाकुर वर्तमान में संविदा शाला वर्ग-2 के पद पर चिखली में कार्यरत हैं। इस उपलब्धि पर विनय ने अपने परिवार एवं चम्पेवार सर एवं मेडम को श्रेय दिया है। स्व.भवन सिंह ठाकुर एवं माताजी मुनिया बाई ठाकुर के सुपुत्र विनय प्रकाश ठाकुर की इस उपलब्धि पर उनके परिवारजन, ईष्टमित्रों एवम् शुभचिंतकों ने बधाईयाँ प्रेषित की हैं।

पत्रकार संजय शुक्ला 24 को होंगे सम्मानित
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बैतूल। ससुराल में शौचालय न होने पर शादी के दूसरे दिन पति का घर छोडऩे वाली जीतूढाना की नवविवाहिता की खबर प्रकाशित करने वाले बैतूल के पत्रकार संजय शुक्ला को 24 अप्रैल को सुलभ इंटरनेशनल द्वारा पुरुस्कृत किया जाएगा। राजधानी नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें ढाई लाख रुपए एवं सुलभ इंटरनेशनल स्वच्छता पुरुस्कार भी दिया जाएगा। सुलभ इंटरनेशनल के प्रमुख बिंदेश्वर पाठक की मौजूदगी में यह पुरुस्कार श्री शुक्ला को मिलेगा। उनके अलावा नई दुनिया गु्रप के संपादक आनंद पाण्डे, भोपाल के डिप्टी न्यूज एडीटर भोजराज उच्चसरे को भी इस समारोह में आमंत्रित किया गया है। श्री शुक्ला को सम्मान मिलने पर जिले के पत्रकारों ने बधाईयां दी है। 


परीक्षा फार्म की तिथि बढ़ाने की मांग 
बैतूल। कॉलेज के द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि आज है। कई छात्र अब तक परीक्षा फार्म नहीं भर पाए। एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं द्वारा परीक्षा फार्म की तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर कॉलेज प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष गौरव खातरकर ने बताया कि जेएच कॉलेज में द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि 21 अप्रैल है। कई विद्यार्थी अब तक परीक्षा फार्म नहीं भर पाए। एनएसयूआई ने तिथि बढ़ाने की मांग का ज्ञापन सौंपा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि फार्म भरने की तिथि नहीं बढ़ाई गई तो कई विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह जाएंगे। इन दिनों जेएच कॉलेज में परीक्षा फार्म भरने विद्यार्थियों की भीड़ लगी है। जिससे विद्यार्थियों को लंबी कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। साथ ही परीक्षा फार्म भरने की तिथि बढ़ाने के साथ साथ कॉलेज के विद्यार्थियों को कैशलेस की जानकारी देकर जागरुक किये जाने की मांग भी की गई। कॉलेज में फीस को लेकर विद्यार्थियों को लंबी कतार लगानी पड़ती है अतिरिक्त कांउटर भी खोलने की मांग एनएसयूआई ने की। 




पंचायतों में पानी के टैंकर बने शोपीस
बैलगाड़ी साइकिलों से पानी ढो रहे ग्रामीण
बैतूल। जिले को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है। वहीं चार विकासखंडों में ग्रामीण क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है आठनेर, मुलताई, प्रभातपट्टन और भीमपुर विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मीलों दूर से पानी बैलगाड़ी, साइकिल एवं पैदल माध्यमों से ग्रामवासी ढो रहे है। वैसे तो सांसद एवं विधायक निधि से जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत को पानी के टैंकर उपलब्ध कराए गए लेकिन अधिकांश पंचायतों में ये टेंकर शोपीस बनकर रह गए है। कुछ पंचायतों में टैंकरों का पता ही नहीं है तो कुछ पंचायतों में टैंकरों का उपयोग शादी विवाह आदि कार्यक्रमों में उपयोग किया जाता है। आलम यह है कि अब पानी के लिए मचते हाहाकार से जल परिवहन की स्थिति निर्मित हो रही है। नलजल योजनाओं के कारण काफी हद तक टेंकरों का उपयोग बंद हो गया था लेकिन अब जब नलजल योजनाएं दम तोडऩे लगी है पंचायतों को पानी का परिवहन करने की आवश्यकता पड़ रही है। गौरतलब है कि जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्र में एक भी विधायक ने गत सत्र में एक भी टैंकर नहीं दिया है। ग्राम पंचायतों से डिमांड आई भी तो वह पूरी नहीं की गई। वहीं दो विधायकों द्वारा पानी की उपलब्धता के लिए ट्यूबवेल खनन, पाईपलाईन के लिए विधायक निधि से राशि दी है। 
पंचायतों में टैंकरों का उपयोग समझ से परे
जिले की विभिन्न पंचायतों को सांसद निधि से दिए गए टैंकरों की यदि बात करें तो ग्राम पंचायतों में ये टैंकर खड़े ही मिलते है। जिला योजना कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार विधायक निधि से जिले में टैंकर नहीं बांटे गए। जो टैंकर है वे सांसद निधि से ही दिए गए है। इन टैंकरों का उपयोग भी जल परिवहन के लिए नहीं किया जा रहा है। आम तोर पर जो टैंकर पंचायतों के पास है उनमें गांव के दबंग का कब्जा, सरपंच सचिवो की मर्जी से टैंकरों का संचालन हो रहा है तो कहीं आलम यह है कि उपयोग न होने से पानी के टैंकर जर्जर हो गए है। कई ग्राम पंचायतों में सांसद निधि से टेंकर तो दिए गए लेकिन पंचायतों के पास ट्रेक्टर की व्यवस्था न होने के कारण भी टैंकरों का उपयोग पंचायतें नहीं कर पाई। बारिश और ठंड के दिनों में वैसे भी पंचायतों को पानी के परिवहन की आवश्यकता नहीं पड़ती लेकिन अब विकराल होती गर्मी को देखते हुए टैंकरों की जरुरत पंचायतों को पडऩे लगी है। 
किसने क्या कहां
जरुरत पड़ी तो देंगे टैंकर- हेमंत खण्डेलवाल
पूर्व में विधानसभा क्षेत्र की पंचायतों में विधायक निधि एवं सांसद निधि से टैंकर दिए गए है। यदि पंचायतों को टैंकर की आवश्यकता पड़ेगी तो दिए जाएंगे। हालांकि हमारे द्वारा पंचातयों में 24 घंटे बिजली की उपलब्धता के हिसाब से कनेक्शन, ट्यूबवेल खनन, पाईपलाईन आदि विधायक निधि से दी गई है। ग्राम पंचायतों में स्थानीय पेयजल व्यवस्थाएं है। अब तक पानी परिवहन की आवश्यकता नहीं पड़ी इसी को देखते हुए टैंकर नहीं दिए गए वैसे भी पूर्व से पंचायतों में टैंकर है जिससे दूसरे टेंकर देने का कोई मतलब नहीं था। यही वजह है कि पेयजल व्यवस्था के लिए अन्य साधन उपलब्ध कराने की कोशिश की है। ग्राम पंचायतों से टैंकरों की डिमांड भी नहीं आई। 
डिमांड आएगी तो निधि से दिए जाएंगे टैंकर- चन्द्रशेखर देशमुख
मुलताई विधानसभा क्षेत्र के विधायक चन्द्रशेखर देशमुख का कहना है कि उनके क्षेत्र से भी पानी के लिए टैंकरों की डिमांड पंचायतों से नहीं मिली। सांसद निधि एवं विधायक निधि से पहले पंचायतों को टैंकर दिए गए है। यदि डिमाँड आएगी तो उनके द्वारा भी टैंकर दिए जाएंगे। इसके अलावा बिजली कनेक्शन, पाईपलाईन के लिए विधायक निधि से राशि दी गई है। 
योजना समिति ने कर दिया था मना- चैतराम मानेकर
आमला विधायक चैतराम मानेकर का कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में पंचायतों को विधायक निधि से टैंकर दिए गए है। लेकिन गत सत्र में एक भी टैंकर नहीं दिए। टैंकर की डिमांड आने पर जिला योजना मंडल को टैंकर के लिए लिखा था लेकिन स्वीकृत नहीं किए गए। वहीं तत्कालीन कलेक्टर ने भी टैंकर देने के लिए मना कर दिया था। जिसके कारण पंचायतों को टेंकर नहीं दिए गए। पूर्व में विधायक एवं सांसद निधि से टैंकर उपलब्ध कराएं गए है। 
इनका कहना...
ग्राम पंचायतों को विधायक निधि से टैंकर नहीं दिए गए है। पूर्व में सांसद निधि से ही टैंकरों का वितरण हुआ है। 
श्री लोखंडे, जिला योजना कार्यालय बैतूल 

सीसीएफ-डीएफओ ने संभाला मोर्चा 
हीरादेही पहुंचकर स्टाफ को दी ट्रेनिंग, शुरु होगी टाईगर की खोज
बैतूल। आठनेर रेंज की हीरादेही वन चौकी के नालघाट क्षेत्र में टाईगर की चहलकदमी को लेकर वन विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने नालघाट क्षेत्र में टाईगर देखे जाने के सांझवीर टाईम्स में प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को हीरादेही के लिए रवाना हुए। 
शाम में ट्रेनिंग रात में एक्शन 
नालघाट क्षेत्र में जहां टाईगर देखा गया उस क्षेत्र के संदर्भ में दक्षिण वन मंडल के डीएफओ देवाप्रसाद ने बताया कि वे हीरादेही में आज मैदानी स्टाफ को टाईगर सर्च के लिए ट्रेनिंग देंगे। उन्होंने बताया कि यह दक्षिण वनमंडल में का क्षेत्र है। जिसका हेडक्वार्टर मोर्शी में है तथा हीरादेही वन चौकी क्षेत्र आठनेर रेंज के अंतर्गत आता है। हीरादेही में मैदानी अमले को डीएफओं द्वारा टाईगर सर्च करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं रात में वन अमले की सीसीएफ आरएस अलावा द्वारा बैठक लेकर विभिन्न दिशा निर्देश दिए जाएंगे। 
भोपाल में मीटिंग के कारण देरी से शुरु हुई कार्रवाई
डीएफओ देवाप्रसाद ने बताया कि कल सीसीएफ एवं जिले के सभी डीएफओं भोपाल में नारंगी भूमि का लेकर आयोजित बैठक में थे। आज सुबह देरी से सभी मुख्यालय आए। जिसके बाद टाईगर के मूवमेंट की जानकारी सांझवीर टाईम्स के माध्यम से पता चली। इसके बाद वन अमले को निर्देश दिए है। वे स्वयं मौके पर पहुंचकर वन कर्मचारियों को ट्रेनिंग देंगे। गौरतलब है कि डीएफओ द्वारा उन दोनों प्रत्यक्षदर्शियों के मोबाइल नंबर भी सांझवीर टाईम्स के प्रतिनिधि से लिए है। इस संबंध में उनके द्वारा बाबूराव दवंडे एवं नितिन दवंडे से भी चर्चा की जाएगी। 
इनका कहना..
हीरादेही क्षेत्र में टाईगर की मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के वन अधिकारी एवं स्टाफ को निगरानी एवं सतर्क रहने के निर्देश दे दिए है। आज रात में वन कर्मियों की बैठक लेकर उन्हें दिशा निर्देश दिए जाएंगे। 
आरएस अलावा, सीसीएफ बैतूल 


एक ने बचाया जीवन, दूसरे डॉक्टर ने मांगे 10 हजार
जिला चिकित्सालय में एक दिन में भगवान के दिखे दो रूप
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बैतूल। जिला चिकित्सालय में शुक्रवार को जीवन देने वाले भगवान (डॉक्टर) के रूप देखने को मिले। दो डॉक्टरों ने दुर्घटना में घायल एक मरीज के न बचने की संभावना  के बीच ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दे दिया। परिजनों ने दोनों डॉक्टरों को भगवान की संज्ञा दे दी। इधर चिकित्सालय में पदस्थ एक चर्चित नेत्र विशेषज्ञ ने पेशे को कंलकित करते हुए विकलांग मरीज से सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करने के 10 हजार रूपए मांग कर पेशे को कंलकित कर दिया है। दोनों मामले की जिला चिकित्सालय में अलग-अलग चर्चा हो रही है। 
पहले प्रकरण में जिला चिकित्सालय में सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय भर्ती कराया था। जिसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बचा पाना संभव नहीं फिर भी अस्पताल के डॉक्टरों के अथक प्रयासों से गंभीर घायल को मौत के मुंह से खींच लाया। विकलांग ने डॉक्टर को रिश्वतखोर बता दिया। देशबंधु वार्ड टिकारी निवासी प्रभूराव चढ़ोकार (52) बाईक से जा रहे थे तभी मुलताई क्षेत्र के ग्राम सोनेगांव के पास गुरूवार की शाम को ट्रेक्टर ने बाईक सवार को रौंद दिया। इस हादसे में प्रभुराव गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे उपचार के लिए मुलताई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भर्ती कराया। हालत बेहद गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। घायल की हालत इतनी खराब थी कि उसे भोपाल या अन्य जगह रेफर करना भी मुश्किल था। जिला अस्पताल के डॉ रमेश बड़वे और डॉ राहुल श्रीवास्तव के अथक प्रयासों के बाद गंभीर घायल को मौत के मुंह से खींचकर उसे बचा लिया गया। अब घायल की हालत में सुधार आ रहा है। यहां तक की घायल ने बोलना शुरू कर दिया है। घायल के परिजनों ने इन डॉक्टरों को धरती के भगवान की संज्ञा देते हुए डॉक्टरों का धन्यवाद दिया। डॉ राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रभूराव चढ़ोकार की हालत इतनी गंभीर थी कि उसके बचने की उम्मीद बेहद कम थी। इसके बावजूद भी उसे बचाने की पूरी कोशिश की और आखिरकार उन्हें सफलता हासिल हो गई। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टरों का प्रयास मरीजों को बचाने का रहता है। 
डॉ पोपली ने मांगे 10 हजार रूपए
जिला चिकित्सालय में मेडिकल बनाने के नाम पर डॉक्टरों द्वारा रिश्वत मांगे जाने के लगातार मामले सामने आ रहे है। शुक्रवार को भी एक मामला ऐसा ही सामने आया जहां एक नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा मेडिकल पर हस्ताक्षर करने के 10 हजार रूपए की मांग की। जिसकी शिकायत प्रभारी कलेक्टर से की है। सारनी पाथाखेड़ा निवासी शारिकराम पिता चन्द्रपाल सिंह (45) ने डॉक्टर पर आरोप लगाते हुए अपनी शिकायत में बताया कि मंगलवार 18 अपे्रल को वे विकलांग सर्टिफिकेट बनाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। मेडिकल सर्टिफिकेट ने कई डॉक्टरों ने हस्ताक्षर कर दिए, लेकिन नेत्र विशेषज्ञ डॉ आईपीएस पोपली उनके मेडिकल पर हस्ताक्षर नहीं किए। शारिकराम ने बताया कि नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर ने मेडिकल हस्ताक्षर करने के 10 हजार रूपए की मांग की जा रही है। नहीं देने पर मेडिकल नहीं बनाने के लिए कहा जा रहा है। शारिकराम ने बताया कि उनका 2007 में विकलांग सर्टिफिकेट बना है जिसे नवीनीकृत करना था। मंगलवार से लेकर अभी तक उन्होंने दो बार अस्पताल आ चुके है, लेकिन डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षर करने के लिए मना कर दिया और पैसे मांगे जा रहे है। इसकी शिकायत पीडि़त ने प्रभारी कलेक्टर से करते हुए डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की। इधर नेत्र विशेषज्ञ डॉ पोपली ने मेडिकल पर हस्ताक्षर करने को लेकर 10 हजार रूपए मांगे जाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। डॉ पोपली का कहना है कि उन्होंने इस तरह से किसी से पैसे की मांग नहीं की। वे कई वर्षो से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे है। पैसे मांगे जाने का सवाल ही नहीं उठता है।
इनका कहना
हमारे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच करेंगे। दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे।
डॉ अशोक बारंगा, सिविल सर्जन, जिला चिकित्साल, बैतूल


प्लॉस्टिक के पतराली और डोने ने छीना हजारों लोगों का रोजगार
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बैतूल। प्लॉस्टिक और थरमाकोल से बने पतराली और डोने ने हजारों लोगों का रोजगार छीन लिया है। पत्तों से निर्मित पतरालियों का चलन खत्म हो गया है। अब पतराली बनाने वाले कारीगर रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहे है। यहां तक की कई लोगों ने दूसरे रोजगार की तलाश शुरू कर दी है। बैतूल आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां शादी, पार्टी सहित कई कार्यक्रमों में पलास के पत्तों से बने डोने और पतरालियों में रिश्तेदारों को भोजन कराया जाता था। डोने पत्तल बनाने वाले सैकड़ों ग्रामीणों की रोजी रोटी चलती थी। शादियों के सीजन में पत्तों से डोने, पत्तल बनाने वाले कारीगरों की खासी कमाई होती थी, लेकिन अब यह शहरों सहित ग्रामीण अंचलों में पत्तों से बनी डोने और पत्तल गुजरे जमाने की बात हो गई है। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों से पत्तों से बनी डोने, पत्तल गायब हो गए है। जिससे हजारों लोगों का रोजगार बंद हो गया है। पत्तल बनाने वाले कारीगर सदन ओर खेमचंद का कहना है कि कुछ वर्ष पहले वे शादी के सीजन में पतराली और डोने का काम करते थे। जिनसे उन्हें हजारों रूपए की कमाई होती थी। यहां तक की इतने आर्डर आ जाते थे कि पतराली बनाना मुश्किल हो जाता था। यह उनके लिए एक व्यवसाय था। जिसके कारण घर परिवार का खर्च पूरे वर्ष तक चलता था, लेकिन जैसे ही प्लॉस्टिक और थरमाकोल के डोने, पतरालियों ने दस्तक दे दी। उनका रोजगार ही खत्म हो गया। अब उनके सामने रोजगार की समस्या आकर खड़ी हो गई है। सरकार भी रोजगार को लेकर उन्हें कोई मदद नहीं कर रही है अब पत्तों से पतराली और डोने वाले कारीगर दूसरे रोजगार की तलाश में जुटे है। 
प्लॉस्टिक के पतराली और डोने सेहत के लिए हानिकारक
प्लॉस्टिक और थरमाकोल से बने पतराली, डोने और गिलास खरीदने में भले ही आसानी हो, लेकिन यह सेहत और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है। लोगों का कहना है कि पत्तों की पतराली पर खाने का आनंद कुछ और था और प्लॉस्टिक से बनी पतराली पर खाने का मजा कुछ और है। पतराली का उपयोग करने के बाद उसे खुले में फेंक दिया जाता है। जिससे सडऩे में महीने लग जाते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्लॉस्टिक और थरमाकोल की पतरालियों पर खाना खाने से बीमारीयां बढऩे का खतरा बना रहता है। प्लॉस्टिक और थरमाकोल से बने डोने और पतराली भले ही पर्यावरण के लिहाज से हानिकारक हो,लेकिन वक्त की यही मांग है। इसलिए इनका इस्तेमाल रोकने और पारंपारिक डोने और पतरालियों का रोजगार बचाने के लिए कही कोई कदम नहीं उठाए जा रहे है।


पांच सौ साल पुरानी शिवाजी की मूर्ति को दिया सम्मान
कांगे्रस कमेटी-कुंबी समाज ने उठाया कदम
बैतूल। नेहरु पार्क में महापुरुष वीर शिवाजी की पांच सौ साल पुरानी प्रतिमा की दुर्दशा मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद जिला कांगे्रस कमेटी एवं कुंबी समाज ने मिलकर मूर्ति को सम्मान पूर्वक व्यवस्थित किया। जिला कांगे्रस अध्यक्ष समीर खाने ने बताया कि यह मूर्ति करीब पांच सौ साल पुरानी है जिसे नगर पालिका द्वारा टायलेट शीट के साथ फेंक दिया था। इस मूर्ति के आसपास से टॉयलेट शीट हटाकर एवं सफाई करने के बाद मूर्ति को धोकर उसे व्यवस्थित कर दिया गया है। इस दौरान कुंबी समाज के मनोज धोटे, पार्षद जमुना पंडागे्र, पंडरी पंडाग्रे, सुभाष पाण्डे, ब्रज पाण्डे, सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। श्री खान ने बताया कि नगर पालिका द्वारा इस विरासत को सहेजना चाहिए। यह मूर्ति पांच सौ साल पुरानी है। ऐसी धरोहरों को यथोचित सम्मान दिया जाना चाहिए। 


कमिश्रर पहुंचे काजली
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बैतूल। शाहपुर तहसील के ग्राम काजली में आयोजित ग्राम उदय से भारत उदय कार्यक्रम में आज कमिश्र उमाकांत उमराव ने पहुंचकर ग्रामीणों से खुली चर्चा की। इस दौरान उन्होंने ग्राम के किसानों को उन्नत एवं जैविक कृषि की जानकारी देते हुए कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए कहा। साथ ही शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों को दी गई। सुबह दस बजे पहुंचे कमिश्नर श्री उमराव कार्यक्रम में करीब डेढ़ घंटे रुके तथा विभिन्न योजनाओं के अलावा जड़ी बूटी, कायाकल्प सहित अन्य विषयों पर चर्चा की। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं भी कमिश्नर को बताई। 

पुलिस परेड ग्राउंड के पास चला सफाई अभियान
बैतूल। स्वच्छ भारत अभियान अंतर्गत अलकेश आर्य अध्यक्ष नगरपालिका परिषद बैतूल की अध्यक्षता में प्रति सप्ताह चलाये जा रहे स्वच्छता मिशन अंतर्गत आज दिनांक 21 अप्रैल 2017  दिन शुक्रवार को प्रात: 08 बजे बैतूल गंज पुलिस परेड ग्राउण्ड एवं ग्राउण्ड के आस-पास साफ-सफाई हेतु स्वच्छता कार्यक्रम रखा गया। अलकेशआर्य बैतूल से बाहर प्रवास पर होने से दिलीप सतीजा सभापति ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग नगरपालिका परिषद बैतूल की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। उक्त अवसर पर एल्डरमेन श्याम टेकपुरे के साथ ही नगर के वरिष्ठजन भगवान सिंह भारद्वाज, डॉ.विनय सिंह चौहान, ब्रजेश पाखरे, राजेन्द्र यादव,रमेश बारस्कर,रामा साहू, संजय चौहान,राजेश शर्मा, नितेश सोनवाय,कुणाल शर्मा,राम अहाके, एवं पत्रकारगणों के साथ-साथ नगरपालिका परिषद बैतूल के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थिति थे। उपस्थित व्यक्तियों द्वारा समर्पण भाव से सफाई कार्यक्रम में अपना योगदान दिया। उक्त अवसर पर दिलीप सतीजा जी द्वारा  नगरवासियों से अनुरोध किया  गया कि वह प्रति शुक्रवार चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान में सहयोग देकर ÓÓस्वच्छ बैतूल सुंदर बैतूलÓÓ ÓÓमेरा बैतूल बनेगा नंबर-1ÓÓ बनायें। साथ ही ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण की दृष्टि से सप्ताह में एक दिवस पैदल अथवा सायकिल से आवागमन करें। 


विनय का बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर चयन 
बैतूल। हाल ही में एमपीपीएससी-2015 के रिजल्ट घोषित हुए जिनमें बैतूल कालापाठा निवासी विनय प्रकाश ठाकुर का बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर चयन हुआ है। गौरतलब है कि विनय प्रकाश ठाकुर वर्तमान में संविदा शाला वर्ग-2 के पद पर चिखली में कार्यरत हैं। इस उपलब्धि पर विनय ने अपने परिवार एवं चम्पेवार सर एवं मेडम को श्रेय दिया है। स्व.भवन सिंह ठाकुर एवं माताजी मुनिया बाई ठाकुर के सुपुत्र विनय प्रकाश ठाकुर की इस उपलब्धि पर उनके परिवारजन, ईष्टमित्रों एवम् शुभचिंतकों ने बधाईयाँ प्रेषित की हैं।


अभी भी पुराने समय पर ही लग रहे स्कूल
शहर में ही आदेश पहुंचने में लग गए दो दिन, परेशान नौनिहाल 
बैतूल। एक बात तो साफ हो गई है कि बैतूल के अधिकारी केवल अपने आदेश को सर्वश्रेष्ठ बताते में कोई कसर नही छोड़ते है। इसके कई उदाहरण देखे जा चुके है। स्कूल जाने वाले नौनिहालों के मामले में तो शीर्ष अधिकारियों ने नियमों की दुहाई दे दी। दूसरे जिलों में छुट्टी लगने के बाद हमारे जिलें में सुबह 11.30 बजे तक बच्चों को स्कूल जाना ही पड़ेगा, लेकिन यह आदेश 19 अप्रैल को जारी हुआ है और अब तक स्कूलों में ही नहीं पहुंचा है। विडम्बना यह है कि दो दिनों मे आदेश नही पहुंचने के बाद अधिकांश स्कूल अपने पुराने समय पर ही लग रहे है। इससे नौनिहालों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। 
भले ही शासकीय नियम कड़े हो लेकिन जब दूसरे जिलों में कम से कम नौनिहालों की चिलचिलाती धूप की वजह से छुट्टी कर दी गई हो, लेकिन बैतूल जिलें में तापमान के नियमों की काफी चर्चा चल रही है। अधिकारियोंं को दोपहर 12 बजे तक गर्मी ना होनेे का एहसास होता है। नौनिहालों और उनके पालकों की तकलीफों के बाद सांझवीर टाईम्स ने दो दिन पहले प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया तो अगले दिन प्रशासन को मजबूरी में एक दिन पहले की तिथि में स्कूलों का समय सुबह 11.30 बजे करना मजबूरी बन गई। इधर दो दिन पहले निकलें आदेश स्कूलों में ना पहुंचने की बात कही जा रही है। ताज्जुब की बात तो यह है कि महज तीन किलो के दायरे में फैले अधिकांश सीबीएसई पैटर्न वाले स्कूलों में यह आदेश पहुंचने में इतना विलंब हुआ कि शुक्रवार तक शहर के ही नही जिले के अन्य स्थानों के स्कूल पुराने समय पर ही लगे है। इससे साफ जाहिर है कि अधिकारियों ने आदेश अभी तक स्कूलों में ही नही पहुंचाया है। हालांकि शहर के दो सीबीएसई पैटर्न वाले स्कूलों में 22 अपै्रल से ग्रीष्म कालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है, लेकिन कुछ स्कूलों मेें अभी भी नियमित रूप से कक्षाएं लगाई जा रही है। इस मामले में पालकों को जागरूक नागरिकों ने साझंवीर टाईम्स की खबर के बाद सोशल मीडिया पर अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। अब देखना यह है कि प्रशासन अपने निर्णय पर अडिग़ रहता है कि स्कूलों में अवकाश घोषित करता है। 
बोक्स
इधर अभाविप ने की छुट्टी की मांग
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गर्मी में नौनिहालों को स्कूल भेजने की खबर सांझवीर टाईम्स में प्रकाशित होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आगे आया है। संगठन के जिला संयोजक नीलेश राठौर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं  ने शुक्रवार को एडीएम मूलचंद वर्मा को ज्ञापन देकर स्कूलों में छुट्टी घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान में पारा 40 डिग्री के उपर चल रहा है। प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत अन्य जिलों में स्कूलों में बच्चों की छुट्टी कर दी गई है, जबकि बैतूल जिले में लगातार स्कूल संचालित किये जा रहे है। ऐसे में बच्चे तेज गर्मी के कारण गंभीर रूप से बीमार हो सकते है। संगठन ने ज्ञापन में बताया कि जिलें के दूरस्थ अंचलों के स्कूलों में बच्चें कई किमी पैदल चलकर आते है। स्कूलों में पंखों तक की व्यवस्था नहीं है।  इस स्थिति में तत्काल स्कूलों में छुट्टी घोषित करने का अनुरोध किया गया है।  इस दौरान संगठन के सुरेन्द्र महाले, प्रतिक सोनी, नीरज सोनी , प्रीति यादव,कार्तिक पंवार, संजू बेडरे, शुभम झरबड़े, निलेश चढ़ोकार, जयेश मालवी, हर्ष खंडेराव सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। 
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अस्पताल में भी नए भवन के लिए पानी का अपव्यय 
सोशल मीडिया पर उभरे नाराजगी के स्वर
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बैतूल। सरकारी निर्माण कार्यों में धड़ल्ले से पानी का दुरूपयोग होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे है। जिला मुख्यालय नवनिर्मित अस्पताल भवन के लिए इस समय हर दिन सैंकड़ो लीटर पानी उपयोग किया जा रहा है। शासकीय कामों में पानी के उपयोग के बाद सोशल मीडिया पर लोगो का आक्रोश बढ़ता जा रही है। 
जिला चिकित्सालय  का नया भवन जनवरी 2018 तक पूरा होगा । करीब 18 करोड़ 53 लाख की लागत से बनने वाले इस नये भवन का निर्माण कार्य ढेड़ वर्ष पहले शुरू हुआ था। एकीकृत कलेक्ट्रेट का निर्माण करने वाले सुनील कुमार जैन कंस्ट्रक्शन कंपनी इसका निर्माण कर रही है। तब से लेकर अब तक लाखों लीटर पानी अस्पताल में नये भवन में उपयोग किया जा चुका है। चूंकि इस समय जिले में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच गई है। ऐसे में पानी का दुरूपयोग किया जाना सरासर गलत है। बताया जाता है कि इस बड़े निर्माण कार्य में ट्यूबवेल के सहारे हर दिन 15 टैंकर पानी उपयोग किया जा रहा है, जबकि पास में जिला चिकित्सालय के मरीजों को अभी से पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। चिकित्सालय के दोनो ट्यूबवेल भी सूखने की कगार पर पहुंच चुके है। मई माह में तो हालात बेकाबू हो जाएगें । पानी लगातार नीचे जाने से निर्माण  कार्यो पर यदि प्रतिबंध नही लगाया गया तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी। 
इनका कहना है 
शासकीय कामों में पानी के उपयोग का मामला मेरे संज्ञान में आया है । विशेषज्ञों से राय लेकर आगे की कार्यवाही तय की जायेंगी 
सौरभ कुमार सुमन, प्रभारी कलेक्टर बैतूल
सोशल मीडिया से 
यदि पानी की कमी के कारण आम लोगों के निर्माण कार्यो पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो शासकीय निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध क्यों नहीं? अन्यथा आम लोगों को भी स्वयं की जवाबदारी पर निर्माण की अनुमति प्रदान की जाए।
प्रदीप खंडेलवाल, कर सलाहकार, बैतूल




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* * * धन्यवाद... 
@...Team Rashtriya Divya Duniya ***

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